ॐ
श्री परमहंस देवाय नम:
आजाद वाणी
1-‘आजाद’ सत्संग में रहो,दुःख रहेंगे दूर
काल माया व्यापे नहीं,सुख रहे भरपूर
श्री परमहंस देवाय नम:
आजाद वाणी
1-‘आजाद’ सत्संग में रहो,दुःख रहेंगे दूर
काल माया व्यापे नहीं,सुख रहे भरपूर
2- ‘आजाद’ मांगो मत कछु, मांगन से यश जाए
मांगन से ही देखो हरी, वामन थे कहाए
मांगन से ही देखो हरी, वामन थे कहाए
3- ‘आजाद’ लोभ ना कीजिए, लोभ पाप का मूल
लोभ के मन में आत ही, धर्म जाए सब भूल
लोभ के मन में आत ही, धर्म जाए सब भूल
4- ‘आजाद’ जग में है सभी, स्वार्थ के ही मीत
झूठे जग के नाते है, झूठी जग की प्रीत
झूठे जग के नाते है, झूठी जग की प्रीत
5- ‘आजाद’ नाम जपते रहो, गुरु चरणी चित जोड़
सुमिरन के प्रताप से, जग का बन्धन तोड़
6- ‘आजाद’ गर्व ना कीजिए, धन, यौवन को पाये
दो दिन के मेहमान सब, काल सभी को खाये
सुमिरन के प्रताप से, जग का बन्धन तोड़
6- ‘आजाद’ गर्व ना कीजिए, धन, यौवन को पाये
दो दिन के मेहमान सब, काल सभी को खाये
7- ‘आजाद’ जग में आए कर, उत्तम कर्म कमाए
धन ना जाए परलोक में, कर्म ही संग जाए
धन ना जाए परलोक में, कर्म ही संग जाए
8- ‘आजाद’ इस चंचल मन को, खाली कभी ना छोड़
या तो सेवा करता रह, या सुमिरन में जोड़
9- ‘आजाद’ अच्छी पुस्तकें, विद्वानों की मीत
भक्ति-साधन बन सकते है, चित्रकला, संगीत
या तो सेवा करता रह, या सुमिरन में जोड़
9- ‘आजाद’ अच्छी पुस्तकें, विद्वानों की मीत
भक्ति-साधन बन सकते है, चित्रकला, संगीत
10- ‘आजाद’ मोह ना कीजिए, मोह दुःखों की खान
मोह ममता को छोड़ दे, तभी मिले भगवान
मोह ममता को छोड़ दे, तभी मिले भगवान
11- ‘आजाद’ नंदकिशोर से, सच्ची करना प्रीत
इच्छा कोई ना रहे, यही प्रीत की रीत
12- ‘आजाद’ मीठा बोलना, सन्तों का है काम
कटु-वचन भी सहन कर, जपना हरदम राम
कटु-वचन भी सहन कर, जपना हरदम राम
13- ‘आजाद’ जैसे भी भजो, मालिक सब सुन ले
माँ समझे है भाव को, बालक जो भी कहे
माँ समझे है भाव को, बालक जो भी कहे
14- ‘आजाद’ सुविधा-दुविधा है, समझ लेहो मन माहिं
अधिक वस्तु के संग्रह में, अधिक बढ़े कठिनाई
अधिक वस्तु के संग्रह में, अधिक बढ़े कठिनाई
15- ‘आजाद’ सुख बाटो सदा, चाहो जो सुखी होना
दुःख जो दोगे दूजों को, तुमको भी पड़े रोना
दुःख जो दोगे दूजों को, तुमको भी पड़े रोना
16- ‘आजाद’ राजा हो गए, जिन्ह लाई प्रभु से प्रीत
बाजा उनका बज गया, माया में जिनका चित
बाजा उनका बज गया, माया में जिनका चित
17- ‘आजाद’ हिन्दी बोलो सदा, करो हिन्दी का प्रचार
अपनी माँ ही करती हैं, बच्चों पर उपकार
अपनी माँ ही करती हैं, बच्चों पर उपकार
18- ‘आजाद’ नारी जननी हैं, करो सदा ही आदर
चण्डी बनकर नाश करेंगी, करोगे अगर अनादर
चण्डी बनकर नाश करेंगी, करोगे अगर अनादर
19- ‘आजाद’ सन्त करते आए है, सदा ही उपकार
कष्ट सहकर भी करते हैं, जीवों का सुधार
कष्ट सहकर भी करते हैं, जीवों का सुधार
20- ‘आजाद’ करें शुभकामना, खूब मनाओ मौज
खुशियों के सन्देश भेजो, ईक-दूजों को रोज़
खुशियों के सन्देश भेजो, ईक-दूजों को रोज़
21- ‘आजाद’ ऊब चुकें बहुत, देख लिए माया के रंग
भाइयों अपनी जैराम की, हम चले सन्तों के संग
भाइयों अपनी जैराम की, हम चले सन्तों के संग
22- ‘आजाद’ सगाई ना सन्त करें, सिर न बान्धे मोर
पले पलाए ले भागते, हैं यहीं सन्तो की टौर
पले पलाए ले भागते, हैं यहीं सन्तो की टौर
23 - ‘आजाद’ अपनी भाषा को, भारतीय रहे है भूल
विदेश जाने के सपने देख, युवक रहे है झूल
विदेश जाने के सपने देख, युवक रहे है झूल
24 - ‘आजाद’ कलियुग में लगी, काम क्रोध की आग
फिर भी इस पापी मन को, नहीं होता वैराग
फिर भी इस पापी मन को, नहीं होता वैराग
25 - ‘आजाद’ इस संसार में, मतलब का व्यवहार
जब लग पैसा गाँठ में, तब लग सारे यार
जब लग पैसा गाँठ में, तब लग सारे यार
26 - ‘आजाद’ मरे जो दूजों हित, दूजों हित जो जीता है
उसका हर आँसू रामायण, प्रत्येक कर्म ही गीता है
उसका हर आँसू रामायण, प्रत्येक कर्म ही गीता है
26 - ‘आजाद’ आलोचना मत करो, कुछ करो नवीन रचना
दुःख न देना सुख बांटना, सबसे बड़ी यही अर्चना
दुःख न देना सुख बांटना, सबसे बड़ी यही अर्चना
27 - ‘आजाद’ प्रेम की आग में, हम तो जले दिन रैन
श्याम-दर्श कारण सखी, मेरे नैन सदा बेचैन
श्याम-दर्श कारण सखी, मेरे नैन सदा बेचैन
28 - ‘आजाद’ महत्व दीजिए, सदा धन से ज्यादा वस्तु को
वस्तु से ज्यादा व्यक्ति को, व्यक्ति से ज्यादा सन्तों को
वस्तु से ज्यादा व्यक्ति को, व्यक्ति से ज्यादा सन्तों को
29 - ‘आजाद’ स्वर्ण के सिक्कों से, भक्ति को न तोल
भक्ति मिलती मोल तो, राजा ले लेते तोल
भक्ति मिलती मोल तो, राजा ले लेते तोल
30 - ‘आजाद’ कलह-चिन्ता सभी, सतसंगत से जाये
दुःख लवलेश रहे नहीं, सुख में रहे समाये
दुःख लवलेश रहे नहीं, सुख में रहे समाये
31 - ‘आजाद’सुख-दु:ख दोनों ही, बिन बुलाये ही आयें
रात दिवस की भांति ही, बिन प्रयास टर जायें
रात दिवस की भांति ही, बिन प्रयास टर जायें
32 - ‘आजाद’ आदर होत है, कभी होत अपमान
दोनों स्वप्न समान है, तज दे देह अभिमान
33 - ‘आजाद’ भक्ति-रंग में जब, रंग जाएगा अंग-अंग
प्रीतम प्यारे मनमोहन, नाचेंगे फिर संग-संग
दोनों स्वप्न समान है, तज दे देह अभिमान
33 - ‘आजाद’ भक्ति-रंग में जब, रंग जाएगा अंग-अंग
प्रीतम प्यारे मनमोहन, नाचेंगे फिर संग-संग
34 - ‘आजाद’ विलम्ब न कीजिये, साध-संग जो होये
ऐसा अवसर सुलभ फिर, होये के ना होये
ऐसा अवसर सुलभ फिर, होये के ना होये
35 - ‘आजाद’ वो ही आजाद है, जाको ना कछु चाह
इच्छा जिसकी मिट गई, वो हो गया बेपरवाह
इच्छा जिसकी मिट गई, वो हो गया बेपरवाह
36 - ‘आजाद’ दुई जब मिटे, होये अद्वैत-प्रकास
परमात्मा संग आत्मा, नित्य रचाये रास
परमात्मा संग आत्मा, नित्य रचाये रास
37 - ‘आजाद’ पराया न कोई, किससे हो फिर छिपना
शीशमहल ये जगत है, हर चेहरा है अपना
शीशमहल ये जगत है, हर चेहरा है अपना
38 - ‘आजाद’ मुरली की तरह, अहं-शून्य हो जाए
श्याम-सलोने का अधरामृत, तब ही तो पाए
श्याम-सलोने का अधरामृत, तब ही तो पाए
39 - ‘आजाद’ नंदकिशोर की, ऐसी अद्भुत माया
हरदम संग रहकर भी, गुरुमुख समझ न पाया
हरदम संग रहकर भी, गुरुमुख समझ न पाया
40 - ‘आजाद’ दर्शक श्याम हैं, स्वयं खेल रहे खेल
स्वयं यात्री हैं बनें, स्वयं चला रहे रेल
स्वयं यात्री हैं बनें, स्वयं चला रहे रेल
41 - ‘आजाद’ हरघट रम रहे, मेरे नंद-किशोर
दृष्टि हो रही धुंधली, दिखै और का और
दृष्टि हो रही धुंधली, दिखै और का और
42 - ‘आजाद’ बहै जात थे, काम-क्रोध की धार
सतमार्ग दिखलाये के, सतगुरु किया सुधार
सतमार्ग दिखलाये के, सतगुरु किया सुधार
43 - ‘आजाद’ जब लग चाह है, तबलग है परवाह
गुरूकृपा से चाह मिटी, हो गए शहंशाह
गुरूकृपा से चाह मिटी, हो गए शहंशाह
44 - ‘आजाद’ निर्बल दीन की, करता कौन संभार
केवल मेरे सतगुरु, दीन्हा सच्चा प्यार
45 - ‘आजाद’ गर्क थे हो रहे, निशदिन माया संग
ज्ञानदृष्टि दी सतगुरु, चढ़ा नाम का रंग
ज्ञानदृष्टि दी सतगुरु, चढ़ा नाम का रंग
46 - ‘आजाद’ दुर्गुण दूजे के, बड़े-बड़े दिखलाये
अनंत दोष जो आपणें, उनपे ध्यान न जाये
अनंत दोष जो आपणें, उनपे ध्यान न जाये
47 - ‘आजाद’ लहर समुंदर की, संतों के इरशाद
साध-वचन जो टालता, होता वो बरबाद
साध-वचन जो टालता, होता वो बरबाद
48 - ‘आजाद’ आशीष से भरे, संतों के इरशाद
संत-वचन जो मानता, रहता वो आबाद
संत-वचन जो मानता, रहता वो आबाद
49 - ‘आजाद’ दीन को देखकर, करिये न अपमान
दीनता भाये प्रभु को, ना भाये अभिमान
दीनता भाये प्रभु को, ना भाये अभिमान
50 - ‘आजाद’ फूलों से कोमल, वज्र से हैं कठोर
संत ही समझें संत को, न समझें कोई और
संत ही समझें संत को, न समझें कोई और
51 - ‘आजाद’ मिटाये आप्पे को, अहं करे जब दूर
दुखड़े सारे फिर मिटें, खुशियां हों भरपूर
दुखड़े सारे फिर मिटें, खुशियां हों भरपूर
52 - ‘आजाद’ सुरमा ज्ञान का, सतगुरु दीन्हा मोय
दृष्टि खुली चानन भया, भ्रम रहा न कोय
दृष्टि खुली चानन भया, भ्रम रहा न कोय
53 - ‘आजाद’ संतों के हृदय, सबके हित की बात
भाव हृदय का देखते, देखें जात न पात
भाव हृदय का देखते, देखें जात न पात
54 - ‘आजाद’ नहीं हैं रीझते, चतुराई से नाथ
भोलेभाले भक्तों के, साहिब हरदम साथ
भोलेभाले भक्तों के, साहिब हरदम साथ
55 - ‘आजाद’ स्नान करा, भोग लगा, श्यामगुण गाइये
हार फूलों के पहना, नाथ को रिझाइये
हार फूलों के पहना, नाथ को रिझाइये
56 - ‘आजाद’ घोड़े बेचकर, सोते हैं वो लोग
सतगुरूकृपा से मिटा, जिनका तृष्णारोग
सतगुरूकृपा से मिटा, जिनका तृष्णारोग
57 - ‘आजाद’ चिंता त्याग कर, चिंतन कर दिन रैन
मन निश्चल हो जाएगा, रूह पाएगी चैन
58 - ‘आजाद’ बुराई देख मत, अच्छाई की कर खोज
सदगुण ग्रहण करने की, कोशिश कर तू रोज
मन निश्चल हो जाएगा, रूह पाएगी चैन
58 - ‘आजाद’ बुराई देख मत, अच्छाई की कर खोज
सदगुण ग्रहण करने की, कोशिश कर तू रोज
59 - ‘आजाद’ मीठे वचन से, सुख की वर्षा होय
महक उठे हृदय की बगिया, मोल लगे न कोय
महक उठे हृदय की बगिया, मोल लगे न कोय
61- ‘आजाद’ जीवन की राह को, ऐसे सरल किया हमने
किसी से मांग ली माफी, किसी को माफ किया हमने
किसी से मांग ली माफी, किसी को माफ किया हमने
62- ‘आजाद’ बीते काल का, करो ना कोई शोक
होनी तो होकर रहे, सके ना कोई रोक
होनी तो होकर रहे, सके ना कोई रोक
63- ‘आजाद’ जीना झूठ है, मरना है भाई साँच
लेकिन आत्मा अमर है, आती न उसे आंच
लेकिन आत्मा अमर है, आती न उसे आंच
64-'आजाद' प्रार्थना करना जाने, जैसे बालक जाने रोना
बाकी मेरे सतगुरु जाने, आगे क्या है होना
बाकी मेरे सतगुरु जाने, आगे क्या है होना
65-'आजाद' सपने देखो ऊंचे, खूब करो प्रयास
परिणाम जैसा भी आए, होना मत उदास
परिणाम जैसा भी आए, होना मत उदास
66-'आजाद' बोलेंगे जो भी, श्रद्धापूर्वक जयसच्चिदानंद
सतगुरु जी की कृपा से, होंगे उनके दुखड़े भंग
सतगुरु जी की कृपा से, होंगे उनके दुखड़े भंग
67-'आजाद' परिवर्तन देह में, आत्म नित्य सम
काहे खुशी मनाए हम, काहे का करें गम
काहे खुशी मनाए हम, काहे का करें गम
”
68-आजाद मन की व्यथा को, जग आगे मत बोल
बैठ जरा एकांत में, प्रभु सम्मुख सब खोल
68-आजाद मन की व्यथा को, जग आगे मत बोल
बैठ जरा एकांत में, प्रभु सम्मुख सब खोल
69-आजाद सतगुरु दर्श की, महिमा है अनन्त
ऋषि-मुनि जन गा रहे, गाते सारे सन्त
ऋषि-मुनि जन गा रहे, गाते सारे सन्त
69-आजाद सतगुरु दर्श की, महिमा है अनन्त
ऋषि-मुनि जन गा रहे, गाते सारे सन्त
ऋषि-मुनि जन गा रहे, गाते सारे सन्त
70-आजाद’जायेगें जग से, कुछ न होगा पास।
दो गज कफन का टुकड़ा, होगा फकत लिबास॥
दो गज कफन का टुकड़ा, होगा फकत लिबास॥
71- ‘आजाद’ पाने के लिये, पड़ता है कुछ खोना।
त्याग कुछ करते नहीं, जाना राम खिलौना॥
त्याग कुछ करते नहीं, जाना राम खिलौना॥
72- ‘आजाद’ कामना भक्ति बिगाड़े, ज्ञान बिगाड़े क्रोध।
लोभ वैराग्य बिगाड़ दे, अहंकार बिगाड़े बोध।।
लोभ वैराग्य बिगाड़ दे, अहंकार बिगाड़े बोध।।
73- ‘आजाद’ सूखे पत्ते हम, चाहे नियति जहाँ उड़ाय ।
होनी तो होकर रहे, कोई कितना जोर लगाय ॥
होनी तो होकर रहे, कोई कितना जोर लगाय ॥
74- ‘आजाद’ भक्ति पथ पर, आगे बढ़ते जायें।
सुख-दुख छाया-धूप सम, किंचित न घबरायें॥
सुख-दुख छाया-धूप सम, किंचित न घबरायें॥
75- ‘आजाद’ विलम्ब न कीजिए, सतसंगत जब होय।
सिर बल जाइये उत्साह से, प्रेममग्न मन होय॥
सिर बल जाइये उत्साह से, प्रेममग्न मन होय॥
76- ‘आजाद’ पैगम्बरी छोड़कर, बन जाओ इंसान।
खुद के अंदर झांक लो, खाली पड़ा मकान।।
खुद के अंदर झांक लो, खाली पड़ा मकान।।
77- ‘आजाद’ नजरिया बदला, नजारे बदल गये।
जब हम सुधर गये तो, सारे सुधर गये।।
जब हम सुधर गये तो, सारे सुधर गये।।
78- ‘आजाद’ तब लग हम बड़े, जब लग हम निराश।
तब ही हम छोटे हुए, जब कीन्ही कुछ आश।।
तब ही हम छोटे हुए, जब कीन्ही कुछ आश।।
79- ‘आजाद’ तुलना मत करो, दूजों के संग अपनी।
अलग-अलग प्रारब्ध है, अलग है सबकी करनी।।
अलग-अलग प्रारब्ध है, अलग है सबकी करनी।।
80- ‘आजाद’ भंवरा श्याम जी, चरण-कमल का तेरे।
मन मंदिर में वास करो, हर पल सांझ सवेरे।।
मन मंदिर में वास करो, हर पल सांझ सवेरे।।
81- ‘आजाद’ मानव बनो प्रथम, फिर बनना कछु और।
मानव बनकर पाओगे, चरण-कमल में ठौर।।
मानव बनकर पाओगे, चरण-कमल में ठौर।।
82- ‘आजाद’ जीवन पतंग की, डोर श्याम के हाथ।
चिंता फिर किस बात की, जब श्यामसुंदर है साथ।।
चिंता फिर किस बात की, जब श्यामसुंदर है साथ।।
83- ‘आजाद’ भक्ति और ज्ञान के, दोनों पंख हों पास।
उड़कर अध्यात्म-आकाश में, पद पाओगे खास।।
उड़कर अध्यात्म-आकाश में, पद पाओगे खास।।
84- ‘आजाद’ कलि के कलुष, कीर्तन से मिट जाये।
हरी आकर हृदय बसें, जो नाम की धुन लगाये।।
हरी आकर हृदय बसें, जो नाम की धुन लगाये।।
85- ‘आजाद’ निर्भय हो रहो, भयभीत होना अज्ञान।
भयभीत करना महापाप है, संत सुनाए ज्ञान।।
भयभीत करना महापाप है, संत सुनाए ज्ञान।।
86- ‘आजाद’ विचार बदले तो, बदल गया संसार।
आचार-व्यवहार बदला तो, हो गया बेड़ा पार।।
आचार-व्यवहार बदला तो, हो गया बेड़ा पार।।
87- ‘आजाद’ काम तो सम्हाले बड़े, राम को संभाला नहीं।
पद तो पाये बड़े-बड़े, राम को पाया नहीं।।
पद तो पाये बड़े-बड़े, राम को पाया नहीं।।
88- ‘आजाद’ भक्ति और ज्ञान का, जब हो जावे मेल।
प्रभु-धाम को दौड़ेगी, जीवन की ये रेल।।
प्रभु-धाम को दौड़ेगी, जीवन की ये रेल।।
89- ‘आजाद’ पुतली श्याम की, आप नचावनहार।
भक्ति-ज्ञान दोनों ही के, आप ही बख़्शनहार।।
भक्ति-ज्ञान दोनों ही के, आप ही बख़्शनहार।।
90- ‘आजाद’ शुभ कर्म को, कल पर तू ना टाल।
काल करूंगा सोचत-सोचत, आ जाए न काल।।
काल करूंगा सोचत-सोचत, आ जाए न काल।।
91- ‘आजाद’ सुख शांति की चाह अगर, सतगुरु महिमा गाइये।
श्री परम हंस देवाय नम: जप, पल-पल नाम ध्याइये।।
92- ‘आजाद’ एक आसरा लेकर, सतगुरु के बन जाइये।
श्रीपरमहंस शरणम् गच्छामि बोल, सतगुरु शरण में आइये।।
श्री परम हंस देवाय नम: जप, पल-पल नाम ध्याइये।।
92- ‘आजाद’ एक आसरा लेकर, सतगुरु के बन जाइये।
श्रीपरमहंस शरणम् गच्छामि बोल, सतगुरु शरण में आइये।।
93- ‘आजाद’ सब साधन का फल यही, मिट जाए अहंकार।
दिनों-दिन बढ़ता ही रहे, परम पिता से प्यार।।
दिनों-दिन बढ़ता ही रहे, परम पिता से प्यार।।
94- ‘आजाद’ दूजे को दुःख देना, सबसे बड़ा है पाप।
परोपकारी के मिटे, आप-पाप- त्रय ताप।।
परोपकारी के मिटे, आप-पाप- त्रय ताप।।
95- ‘आजाद’ देहध्यास त्यागकर, पाले आत्म ज्ञान।
देहाभिमान त्यागे बिना, मिलता नहीं निर्वाण।।
96- ‘आजाद’ जीवन स्वप्न है, साचा है हरी नाम।
नाम जपेगा लगन से, तो मिल जाएंगे राम।।
नाम जपेगा लगन से, तो मिल जाएंगे राम।।
97- ‘आजाद’ सत्संग आय कर, कौवा हंस हो जाये।
मोती सतगुरु- वचनों के, चुग-चुग कर वो खाये।।
मोती सतगुरु- वचनों के, चुग-चुग कर वो खाये।।
98- ‘आजाद’ के भैया-भाभी, प्यारे राधा-श्याम।
इनके चरणों में बैठकर, आत्मा पाए विश्राम।।
99- ‘आजाद’ सतगुरु ने किए हमपर, कितने ही उपकार।
कृतज्ञता ज्ञापित करूं, जाऊं सद- बलिहार।।
इनके चरणों में बैठकर, आत्मा पाए विश्राम।।
99- ‘आजाद’ सतगुरु ने किए हमपर, कितने ही उपकार।
कृतज्ञता ज्ञापित करूं, जाऊं सद- बलिहार।।
100- ‘आजाद’ करे ये बेनती, मेरी तोड़ तक निभ जाये।
कृपा से प्रभु आपकी, मेरी नैया पार लग जाये।।
कृपा से प्रभु आपकी, मेरी नैया पार लग जाये।।
बोल जय
कारा
बोल मेरे श्री गुरूमहाराज जी की जय

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